टोल भुगतान को अधिक सुव्यवस्थित बनाने, विवादों को कम करने और धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और सड़क परिवहन मंत्रालय ने फास्टैग नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। ये नए नियम सोमवार से प्रभावी हो गए हैं, जिससे उन यूजर्स को अधिक सतर्क रहना होगा जो भुगतान में देरी करते हैं या जिनका टैग ब्लैकलिस्ट हो चुका है।
क्या हैं फास्टैग के नए नियम?
1. कम बैलेंस या ब्लैकलिस्टेड टैग पर लगेगा जुर्माना
अगर किसी वाहन का फास्टैग निष्क्रिय है और टोल पार करने से 60 मिनट पहले और टोल पार करने के 10 मिनट बाद तक सक्रिय नहीं होता, तो उस लेन-देन को अस्वीकार कर दिया जाएगा।
2. टोल भुगतान में देरी पर अतिरिक्त शुल्क
यदि वाहन टोल रीडर से गुजरने के 15 मिनट बाद तक लेन-देन अपडेट नहीं होता है, तो फास्टैग यूजर को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है।
3. शिकायत दर्ज करने की नई प्रक्रिया
अगर किसी यूजर को फास्टैग से संबंधित कोई समस्या आती है, तो वह अब 15 दिन बाद अपनी शिकायत दर्ज कर सकेगा।
4. चार्जबैक और लेनदेन अस्वीकृति नियमों में बदलाव
नए दिशा-निर्देशों में चार्जबैक प्रक्रिया और कूलिंग पीरियड को लेकर भी बदलाव किए गए हैं, जिससे टोल विवादों को कम किया जा सके।
फास्टैग यूजर्स के लिए क्या जरूरी है?
फास्टैग यूजर्स को इन नए नियमों का पालन करना जरूरी होगा। सुनिश्चित करें कि फास्टैग वॉलेट में पर्याप्त बैलेंस हो, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य टोल भुगतान प्रणाली को तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।
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