महराजगंज, उत्तर प्रदेश। जिले के बृजमनगंज थाना क्षेत्र से फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक दिव्यांग दृष्टिहीन युवक के नाम पर धोखाधड़ी करके फर्जी फर्म रजिस्टर की गई और अब उसके ऊपर 86 लाख रुपये का जीएसटी बकाया थोप दिया गया है। पीड़ित युवक ने जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित युवक बबलू, करमहा गांव का निवासी है, जो जन्म से ही दृष्टिहीन और आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। बबलू ने बताया कि करीब 10 साल पहले गनशपुर गांव के अग्रहरी ट्रेडर्स के मालिक आदेश अग्रहरी के बेटे बासुदेव अग्रहरी और उसके मुनीब रजनीश उर्फ राजन ने उसे विकलांग पेंशन दिलवाने का झांसा दिया और उसके जरूरी दस्तावेज ले लिए।
### वर्षों बाद फर्जीवाड़े का हुआ खुलासा
बबलू को उम्मीद थी कि उसके खाते में पेंशन आएगी, लेकिन पांच-छह महीने बीत जाने के बाद भी कोई पैसा नहीं आया। कई बार पूछताछ करने पर भी उसे टाल दिया गया। इसी बीच 29 जून 2025 को उसके घर एक अमीन नोटिस लेकर पहुंचा और बताया कि उसके नाम पर वर्ष 2016-17 के लिए 86 लाख रुपये का जीएसटी बकाया दर्ज है।
यह सुनकर पीड़ित के होश उड़ गए। उसने बताया कि उसका न तो किसी व्यापार से कोई लेना-देना है और न ही वह किसी फर्म का मालिक है। उसके पास इतनी सामर्थ्य भी नहीं कि वह किसी व्यवसाय को चला सके।
बबलू जब अग्रहरी ट्रेडर्स के मालिक आदेश अग्रहरी से मिलने गया तो उन्होंने केवल यह कहकर बात टाल दी कि "गलती से तुम्हारे नाम पर चला गया है", और पूरा दोष अपने मुनीब रजनीश पर डाल दिया। पीड़ित ने बताया कि जब उसने गांव के अधिवक्ताओं और संभ्रांत लोगों से राय ली, तो साफ हो गया कि यह एक योजनाबद्ध फर्जीवाड़ा है
दृष्टिहीन बबलू ने जिलाधिकारी महराजगंज को पत्र सौंपकर मांग की है कि:
* फर्जी तरीके से उसके नाम पर बनाई गई फर्म की जांच कर कार्रवाई की जाए।
* 86 लाख रुपये के जीएसटी नोटिस को निरस्त किया जाए।
* संबंधित आरोपियों – आदेश अग्रहरी, बासुदेव अग्रहरी और रजनीश उर्फ राजन – के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
* उसके बैंक खाते और अन्य दस्तावेजों के दुरुपयोग की जांच कर दोषियों को सजा दी जाए।
### प्रशासन ने शुरू की जांच
डीएम कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को जांच के आदेश दे दिए हैं। जीएसटी विभाग और स्थानीय पुलिस को निर्देश दिया गया है कि पीड़ित के दस्तावेजों और नोटिस की सत्यता की जांच करें और यदि फर्जीवाड़ा पाया जाता है तो आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
यह मामला न केवल एक गरीब दिव्यांग के साथ धोखाधड़ी का है, बल्कि सरकारी तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पीड़ित को कब और कितना न्याय दिला पाता है।

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