हमारे प्रिय तहसीलदार साहब श्री जितेंद्र सिंह पटेल जी का कोंच की इस स्नेहमयी कर्मभूमि से इटावा जनपद के लिए स्थानांतरण हो गया है। आज जनपद प्रशासन द्वारा उन्हें प्रशासनिक दायित्वों से अधिकारिक रूप से कार्यमुक्त भी कर दिया गया।
श्री पटेल जी का कार्यकाल केवल एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी की रूटीन कार्यप्रणाली तक सीमित नहीं रहा। वे एक ऐसे मार्गदर्शक रहे, जिन्होंने अपने आचरण से यह सिद्ध किया कि सत्ता और पद का वास्तविक सौंदर्य जन-संवेदनशीलता में निहित होता है। उनकी त्वरित निर्णय क्षमता, पारदर्शी कार्यशैली, और हर फरियादी के प्रति अगाध आत्मीयता ने जनता और प्रशासन के बीच की दूरी को पूरी तरह समाप्त कर दिया। जटिल से जटिल समस्याओं को सहज मुस्कान और असीम धैर्य के साथ सुलझा देने की उनकी कला विरले ही देखने को मिलती है।
मेरे लिए उनका सानिध्य केवल एक वरिष्ठ अधिकारी का नहीं, बल्कि एक बड़े भाई की छत्रछाया और सघन वटवृक्ष के समान था, जहाँ सदैव संबल, संस्पर्श और आत्मीयता मिली।
जीवन के एक ऐसे मोड़ पर, जब मैं व्यक्तिगत और मानसिक उलट-पुलट से जूझते हुए अपनी प्रतिभा और अपनी लेखनी के प्रति हतोत्साहित महसूस करने लगा था, तब आपने ही मुझे संभाला। आपने मुझे न केवल मोटिवेट कर हार मानने से रोका, बल्कि हर परिस्थिति में साथ खड़े रहने का भरोसा देकर मेरे भीतर एक नई उमंग और नए उत्साह का संचार किया। आज मैं यह दृढ़ संकल्प लेता हूँ कि एक दिन उस मुकाम को अवश्य हासिल करूँगा, जहाँ आप मुझे देखना चाहते हैं।
मेरे मनोभावों को समझते हुए आपने यह दिलासा भी दिया कि कोंच तहसील की बागडोर संभालने वाले नवागंतुक तहसीलदार साहब से भी वही स्नेह और सानिध्य मिलेगा—यह आपकी महानता और बड़प्पन है। किंतु सच यही है कि आपके जाने से जो स्थान रिक्त हुआ है, उसकी भरपाई असंभव है।
यद्यपि स्थानांतरण प्रशासनिक सेवा का अनिवार्य नियम है और लोकसेवा का यह निरंतर प्रवाह ही प्रशासनिक जीवन का शाश्वत सत्य है। आज कोंच की माटी आपको विदा करते हुए सजल नयनों और कातर हृदय से खड़ी है, किंतु आपकी कार्यकुशलता और सद्व्यवहार की महक यहाँ की हवाओं में सदैव रची-बसी रहेगी।
इटावा जनपद की नई कर्मभूमि पर आपके आगमन से जनसेवा का एक नया स्वर्णिम अध्याय प्रारंभ होगा। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि आपका भावी कार्यकाल अभूतपूर्व सफलता, अक्षय यश, और जन-कल्याण के नए कीर्तिमानों से सुशोभित हो। कोंच की जनता और मैं स्वयं, आपके अमूल्य योगदान और बड़े भाई जैसे स्नेह को सदैव सादर और सस्नेह स्मरण रखेंगे।
आपका पारसमणि अग्रवाल

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